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BPNLIVE

 राजवी से नाराजगी, संगठन पदाधिकारी भी कर रहे विरोध

एक ही परिवार से तीन उम्मीदवार मांग रहे वोट

जानिए कौन है सबसे मजबूत दावेदार, किसके जीत के हैं समीकरण, कौन दे सकता है कांग्रेस को टक्कर

 

 

जयपुर। विधानसभा चुनावों के लिए रस्साकसी तेज होने लगी है। कांग्रेस-बीजेपी में टिकट की दावेदारी को लेकर मारामारी मची है। इसी बीच जयपुर की 19 विधानसभा सीटों में से एक सीट ऐसी भी है, जहां एक ही परिवार के तीन सदस्य टिकट की दावेदारी जता रहे हैं। यह वह सीट है, जिस पर भाजपा मान कर चल रही है कि यहां से जो भी मैदान में उतरेगा, वह जीतकर आ सकता है। यही कारण है कि सुरक्षित सीट तलाश रहे सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने भी यहां नजरें टिका रखी हैं। बात हो रही है जयपुर की विद्याधर नगर विधानसभा सीट की।

दरअसल, कांग्रेस यहां से विक्रम सिंह शेखावत को दो बार मैदान में उतार चुकी है और दोनों चुनाव में उन्हें नरपत सिंह राजवी ने शिकस्त दी थी। इस बार भी विक्रम सिंह मानकर चल रहे हैं कि उनका टिकट पक्का है। विक्रम सिंह को कांग्रेस का संभावित उम्मीवार मानकर ही भाजपा टिकट के दावेदार अपनी-अपनी गणित के हिसाब से दावे जता रहे हैं। हालांकि जिस तरह से वर्तमान विधायक नरपत सिंह राजवी से क्षेत्र की जनता और बीजेपी संगठन में नाराजगी है, उस हिसाब से तो यही कहा जा सकता है कि बीजेपी भी यदि किसी नए चेहरे पर दाव लगाती है, तो स्थिति ज्यादा आरामदायक होगी।

 

 

5 साल तक मंत्री पद का इंतजार करते रहे राजवी

 

पूर्व उपराष्ट्रपति व मुख्यमंत्री रहे भैरोसिंह शेखावत के दामाद नरपत सिंह राजवी इस बार भी यहां से टिकट की दावेदारी जता रहे हैं। आश्चर्य की बात है कि उनके बेटे अभिमन्यु सिंह भी इसी सीट से दावा कर रहे हैं। बेटी मूमल बीकानेर से टिकट चाह रही हैं। राजवी इन दोनों सीटों में से किसी भी सीट पर टिकट लेना चाहते हैं।  मोदी लहर पर सवार होकर पिछला विधानसभा चुनाव जीतने वाले नरपत सिंह राजवी किसी वरिष्ठ मंत्रीपद की उम्मीद लगाए बैठे थे लेकिन उनका इंतजार चलता ही रहा और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से विरोध के चलते उन्हें मंत्री पद नहीं मिल पाया। इस बीच इस बार हालात यह भी बन सकते हैं कि उनका टिकट कट जाए। ऐसे में टिकट परिवार के बाहर नहीं जाए, यही कोशिश की जा रही है। एक नहीं तो दूसरा, दूसरा नहीं तो तीसरा। इस बात से सभी वाकिफ हैं कि पूर्व उपराष्ट्रपति ने भी पूर्व के विधानसभा चुनाव के दौरान नरपत सिंह राजवी के पक्ष में वोट मांगे थे। जबकि वे देश के दूसरे सर्वोच्च संवैधानिक पद पर रहने के बाद किसी अन्य विधानसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन के वास्ते कहीं नहीं गए।

 

 

ये जता रहे हैं दावेदारी

संसदीय कार्य मंत्री राजेंद्र राठौड़ इस बार तारानगर छोड़ विद्याधर नगर से टिकट पाना चाह रहे हैं। इनके अलावा महिला मोर्चा से जुड़ी रहीं एकता अग्रवाल भी दावा जता रही हैं। हालांकि आमजन के बीच उनके नाम की ज्यादा चर्चा नहीं है। इस बीच जनसमस्या निवारण मंच के तहत रोज जनसुनवाई करने वाले सूरज सोनी भी चुनाव मैदान में हैं। नए चेहरे के रूप में सूरज लंबे समय से भाजपा के कार्यकर्ता हैं और लोगों के बीच पकड़ भी है। क्षेत्र में नरपत सिंह के खिलाफ लोगों की नाराजगी भी है। असल में स्थानीय मुद्दों के अलावा राष्ट्रीय मुद्दों पर सूरज सोनी लगातार आंदोलनों के जरिए चर्चा में बने रहते हैं, इसका फायदा भी उन्हें मिल सकता है। यही नहीं पीपल फॉर एनिमल के जरिए वाइल्ड लाइफ और पर्यावरण संरक्षण के काम हों या मतदान परिष्कार और चुनाव सुधार जैसे आंदोलनों के जरिए कामों के कारण सूरज की लोगों के बीच पैठ बनी हुई है।

 

 

परिवार से बाहर न जाए टिकट

इधर नरपत सिंह के बेटे अभिमन्यु सिंह अभी तक पिता के साथ ही राजनीति करते रहे हैं। बेटी मूमल को पारिवारिक अनुभव ही है। ऐसे में नए चेहरों के रूप में भाजपा हाईकमान संभव है उन पर रिस्क न उठाए। मूमल या अभिमन्यु को टिकट दिए जाने से इस बात की भी आशंका बढ़ सकती है कि लोग वंशवाद का आरोप लगाएं। सालों से पार्टी के लिए काम करने वाले कार्यकर्ता नाराज भी हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में एकता अग्रवाल और सूरज सोनी जैसे नए दावेदारों की स्थिति मजबूत हो सकती है। पिछले चुनाव में सूरज निर्दलीय के तौर पर चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी में थे, लेकिन पार्टी मुख्यालय के बाहर ही उनके काफिले को तत्कानील सह प्रभारी किरीट सोमैया और पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. महेश शर्मा ने रुकवा लिया और फार्म न भरने के लिए मना लिया था। इस बार इन दावेदारों में कौन हाईकमान तक अपना दावा मजबूती से ठोक सकेगा, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। 

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