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पिछले 7 सालों में तीन गुना बढ़ा राजस्थान का कर संग्रह

पूर्वोत्तर की सूची में मिजोरम टॉप पर, उत्तर प्रदेश के हाल बेहाल

 

नई दिल्ली। सबसे ज्यादा इनकम टैक्स देनेवाले राज्यों की लिस्ट में महाराष्ट्र टॉप पर है। अकेले इस राज्य का योगदान लिस्ट में शामिल अगले चार राज्यों के कुल योगदान से ज्यादा है। वहीं, महाराष्ट्र के साथ दिल्ली मिलकर देश का आधा इनकम टैक्स देते हैं। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड की ओर से जारी इनकम टैक्स के आंकड़ों से इसका खुलासा हुआ है। इस खुलासे से इस बात के भी संकेत मिलते हैं कि जिस राज्य में जितनी ज्यादा कंपनियां हैं, वहां से सबसे ज्यादा टैक्स कलेक्शन होता है। सीबीडीटी के आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2017-18 में इनकम टैक्स कलेक्शन में वृद्धि के लिहाज से पूर्वोत्तर के राज्यों ने शेष भारत पर बाजी मारी है। इन सबके अलावा, इनकम टैक्स को लेकर अन्य कई दिलचस्प तथ्य भी सामने आए हैं।

 

वित्त वर्ष 2017-18 में आयकर संग्रह में योगदान के लिहाज से शीर्ष 5 राज्य

महाराष्ट्र - 38.3 फीसदी

दिल्ली - 13.7 फीसदी

कर्नाटक - 10.1 फीसदी

तमिलनाडु - 6.7 फीसदी

गुजरात - 4.5 फीसदी

 

आयकर संग्रह में वृद्धि के मामले में पूर्वोत्तर राज्य सबसे आगे

शीर्ष पांच राज्य

मिजोरम - 41 फीसदी

नागालैंड - 32.1 फीसदी

सिक्किम - 26 फीसदी

त्रिपुरा - 16.7 फीसदी

मेघालय - 12.7 फीसदी

 

कुल राजस्व में प्रत्यक्ष कर का योगदान

2001-01 - 36.3 फीसदी

2017-18 - 52.3 फीसदी

 

कुल करदाताओं की संख्या 60 फीसदी बढ़ी

वित्त वर्ष 2013-14 - 88,649

वित्त वर्ष 2017-18 - 1,40,139

 

1 करोड़ से ज्यादा आय घोषित करनेवाले व्यक्तिगत करदाता

वित्त वर्ष 2013-14 - 48,416

वित्त वर्ष 2016-17 - 81,344

 

दिलचस्प तथ्य

1. सबसे ज्यादा रिटर्न में 5 लाख तक की आय घोषित की जाती है और इसी वर्ग से सबसे ज्यादा टैक्स कलेक्शन भी होता है।

2. 2 करोड़ इंडिविजुअल्स रिटर्न फाइल करते हैं, लेकिन एक रुपया भी टैक्स नहीं देते।

3. 2 करोड़ लोग टैक्स देते हैं, लेकिन रिटर्न नहीं भरते।

4. सिर्फ 4 भारतीय ही सालभर में 100 करोड़ से ज्यादा का इनकम टैक्स भरते हैं।

5. 93 फीसदी इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स सालाना 1.5 लाख से कम इनकम टैक्स देते हैं।

6. वित्त वर्ष 2013-14 से 2017-18 तक के चार सालों में फाइल किए गए इनकम टैक्स रिटर्न
की संख्या 3.31 करोड़ से 80 फीसदी बढ़कर 6.85 करोड़ हो गई।

7. 2014-15 से 2017-18 के बीच 1 करोड़ से ज्यादा की आय घोषित करने वाले कुल करदाताओं की संख्या 60 फीसदी बढ़ गई है। इनमें कंपनियां, छोटे-छोटे फ र्स, हिंदू अविभाजित परिवार सभी प्रकार के करदाता शामिल हैं।

8. 1 करोड़ से ज्यादा की आय घोषित करने वाले इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स की संख्या चार साल में 68 फीसदी बढ़ी है।

9. महाराष्ट्र और दिल्ली का योगदान पहले के मुकाबले घट रहा है जबकि कर्नाटक, तमिलनाडु और गुजरात की हिस्सेदारी बढ़ रही है।

10. बड़े राज्यों में राजस्थान ऐसा प्रदेश है जहां टैक्स कलेक्शन सात वर्षों में तीन गुना से ज्यादा बढ़ा है।

11. सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य उत्तर प्रदेश इनकम टैक्स कलेक्शन में सिर्फ 2.3 फीसदी का योगदान करता है।

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