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विद्याधर नगर विधानसभा में पहली बार रोचक त्रिकोणीय मुकाबला
कांग्रेस भी दावेदारी मजबूत करने में जुटी, चुनाव प्रचार में तेजी
जयपुर। राजधानी जयपुर में विधानसभा चुनावों की सांगानेर के बाद सबसे हॉट सीट विद्याधर नगर बन गई है। नामांकन पत्र वापस लेने का समय बीतने के साथ ही चुनाव मैदान में डटे दावेदारों की स्थिति भी स्पष्ट हो गई है। क्षेत्र में पहली बार निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में उतरे विक्रम सिंह शेखावत के मैदान में डटे रहने से क्षेत्र में रोचक त्रिकोणीय मुकाबला होना तय है। कांग्रेस अपने समीकरणों के बूते, बीजेपी एक बार फिर मोदी के नाम पर और शेखावत अपने कॉडर के भरोसे चुनाव में डटे हैं।
विद्याधर नगर विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो यह विधानसभा परंपरागत रूप से बीजेपी का गढ़ रही है। पिछले दो चुनावों में यहां से बीजेपी के प्रत्याशी रहे वरिष्ठ विधायक नरपत सिंह राजवी ने विक्रम सिंह शेखावत को हराकर जीत दर्ज की है। इस बार टिकट कटने से नाराज विक्रम सिंह निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में हैं, वहीं कांग्रेस के टिकट पर सीताराम अग्रवाल पहली बार चुनावों में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। हालांकि चुनावी जाजम अभी पूरी तरह से बिछी नहीं है और प्रचार अभियान भी जोर नहीं पकड़ पाया है लेकिन पहली बार विधानसभा क्षेत्र में जो नया माहौल देखने को मिल रहा है, वह है बीजेपी के कॉडर की अनुपस्थिति। कहने को तो क्षेत्र में बीजेपी के चुनाव कार्यालय खुलने लगे हैं और जनसंपर्क भी शुरू हो गया है लेकिन हर चुनावों में दिखने वाली बीजेपी कार्यकर्ताओं की फौज इस बार गायब दिखाई दे रही है और यही कारण है कि चुनाव के पहले चरण में ही बीजेपी को कार्यकर्ताओं की नाराजगी का सामना भी करना पड़ रहा है। 
 
कांग्रेस का नए चेहरे पर दाव
कांग्रेस ने पिछले दो चुनावों से उलट इस बार सीताराम अग्रवाल के रूप में नए चेहरे पर दांव खेला है। सीताराम वैश्य-ब्राह्मण समीकरणों के बूते और कांग्रेस के परंपरागत वोटबैंक के भरोसे चुनाव मैदान में हैं। धीरे-धीरे कार्यकर्ताओं की टीम भी सक्रिय हो चुकी है और कांग्रेस की तरफ से जनसंपर्क अभियान भी शुरू हो चुका है। क्षेत्र में बीजेपी की एंटी इनकंबेंसी का फायदा कांग्रेस को होता दिखाई दे रहा है। बीजेपी के नाराज वोटर्स का रुख भी कुछ हद तक कांग्रेस की तरफ है। हालांकि यह चुनाव प्रचार का पहला ही चरण है लेकिन संकेत बीजेपी के लिए ठीक नहीं हैं। यदि बीजेपी के कोर वोटर्स ने पार्टी का साथ छोड़ा तो इसका सीधा फायदा सीताराम अग्रवाल को हो सकता है। 
 
विक्रम सिंह बागी बनकर डटे
वहीं दूसरी तरफ विक्रम सिंह शेखावत क्षेत्र में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में डटे हैं। बीजेपी के नाराज कार्यकर्ताओं का एक बड़ा वर्ग विक्रम सिंह के साथ खुलकर दिखाई दे रहा है। वहीं मैन-टू-मैन मार्किंग की उनकी क्षमता का भी असर साफ तौर पर काम कर रहा है। हालांकि पिछले दो चुनावों में विक्रम सिंह को क्षेत्र में हार का सामना करना पड़ा था लेकिन इस बार निर्दलीय के तौर पर भी उनकी दमदार मौजूदगी साफतौर पर देखी जा सकती है। युवा वोटर्स में विक्रम सिंह का क्रेज साफ तौर पर दिखाई देता है। वहीं बीजेपी के वोटबैंक में कांग्रेस के साथ-साथ विक्रम सिंह की बड़ी सेंधमारी भी साफ दिखाई दे रही है और यही समीकरण क्षेत्र में चुनाव को त्रिकोणीय बना रहा है। 
 
ऊपर शांत, अंदर बगावत के बुलबुले 
टिकट वितरण से पहले ही विद्याधर नगर सीट को लेकर बीजेपी में गहरी नाराजगी सामने आई थी। क्षेत्र के चारों मंडलों के पदाधिकारियों ने विधायक नरपत सिंह राजवी को फिर से उम्मीदवार बनाने का विरोध किया था लेकिन तमाम आशंकाओं के बावजूद राजवी टिकट लेकर फिर से चुनाव मैदान में हैं। इसके बाद खुले विरोध की आशंका था, ऐसा तो नहीं हुआ लेकिन अब बीजेपी के अंदर ही अंदर बगावत के बुलबुले फूट रहे हैं। पार्टी का पूरा कॉडर ऊपर से नीचे तक दो धड़ों में बंटा है। इसका असर भी पार्टी के चुनाव प्रचार और प्रबंधन पर साफ देखा जा सकता है। पहले ही दिन से युद्ध स्तर पर शुरू होने वाले प्रचार की आदी भाजपा में अभी तक ढंग से कार्यकर्ताओं से संपर्क भी नहीं हो पाया है। हालंाकि अब संघ पदाधिकारियों का सक्रिय कर कार्यकर्ताओं की नाराजगी को दूर करने की कोशिश की जा रही है लेकिन इसमें सफलता कितनी मिलेगी यह सवाल अनुत्तरित है।  

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