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BPNLIVE

सरकार ने डिजिलॉकर को मान्यता दी, सॉफ्ट कॉपी होगी मान्य
परिवहन मंत्रालय ने जारी की अधिसूचना, ट्रैफिक पुलिस को वाहन के असली दस्तावेज दिखाने की बाध्यता समाप्त
डिजिलॉकर ऐप एंड्रॉयड और आईओएस फोन पर मौजूद, लेकिन एमपरिवहन एंड्रॉयड पर ही मिलेगा
नई दिल्ली। डिजिलॉकर को मान्यता देते हुए केंद्र ने परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस को निर्देश दिया कि वेरिफिकेशन के लिए असली दस्तावेज न देखे जाएं। आईटी एक्ट-2000 के तहत डिजिलॉकर या एमपरिवहन ऐप पर मौजूद दस्तावेज की ई-कॉपी को वैध माना जाएगा। यह नियम पूरे देश में लागू हो गया है। वहीं, ट्रैफिक पुलिस भी अपने मोबाइल में मौजूद दोनों तरह के ऐप से ड्राइवर और वाहन की जानकारी डेटाबेस से मिला सकेगी। 
ओवरस्पीड, ट्रैफिक सिग्नल तोडऩे और वाहन चलाते वक्त फोन इस्तेमाल करने पर ट्रैफिक पुलिस ड्राइविंग और आरसी आदि असली कागजात जमा करा लेती थी। कई बार डॉक्युमेंट्स खो जाते थे, जिससे यूजर को परेशान होना पड़ता था। मध्यप्रदेश, बिहार और कर्नाटक ने सबसे पहले डिजिलॉकर में रखी सॉफ्ट कॉपी को वैध मानना शुरू किया।  
 
 
आधार नंबर से जुड़ेंगे ये दोनों ऐप
मोबाइल में डिजिलॉकर या एमपरिवहन ऐप डाउनलोड करके साइनअप करना होगा। मोबाइल नंबर फीड करने पर ओटीपी मिलेगा, जिसे डालने के बाद अकांउट बनाया जा सकेगा। इसके बाद दोनों ऐप को आधार नंबर से वैलिडेट करना होगा। इसके बाद ड्राइविंग लाइसेंस, आरसी आदि कागजात की सॉफ्ट कॉपी इसमें रख सकेंगे। ट्रैफिक पुलिस के मांगने पर आपको सिर्फ ऐप का क्यूआर कोड दिखाना होगा, जिससे उन्हें आपकी पूरी डिटेल मिल जाएगी। 
 
 
आरटीआई के बाद यह फैसला किया
इस वक्त डिजिलॉकर ऐप एंड्रॉयड और आईओएस दोनों प्लेटफॉर्म पर मौजूद है। हालांकि एमपरिवहन फिलहाल एंड्रॉयड फोन पर ही मिलेगा। मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि करीब 10 दिन में यह एप्लीकेशन भी आईओएस पर आ जाएगी। मंत्रालय के मुताबिक, काफी लोगों ने आरटीआई से सवाल पूछा था कि सरकार अपने डिजिटल फॉर्मेट को मान्य क्यों नहीं कर रही है। इसके बाद डिजिलॉकर को मान्यता दे दी गई। 
 

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